इशारों पर चल पड़ेगा कंप्यूटर
७ सितम्बर २०१२जर्मनी के सेंटर फॉर आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के वोल्फगांग वाल्स्टर जर्मनी के जाने माने कंप्यूटर विज्ञानी हैं. सारब्रुकेन यूनिवर्सिटी और दूसरी एजेंसियों के साथ मिल कर वह भविष्य का कंप्यूटर बना रहे हैं.
इससे खरीदारी जैसे रोजमर्रा के काम आसान हो जाएंगे. ये लोग सुपर मार्केट मॉडल पर काम कर रहे हैं. यहां की चीजों को कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है. चाहे वाइन की बोतल हो या कुछ और.
यहां अंगुली रखते ही प्रोडक्ट के बारे में सारी जानकारी मिल जाएगी. और एक ट्रॉली भी है, जो ग्राहकों को मनचाहे प्रोडक्ट तक पहुंचा सकती है.
वाल्स्टर का लक्ष्य है कि कंप्यूटर लोगों से बात करे, "जरूरी है कि यह ऐसा हो, जिसके साथ लोग खुद को आसानी से ढाल सकें. हमें कीपैड और माउस वाले कंप्यूटर नहीं चाहिए, जैसे कि पहले था. हमारी कोशिश है कि लोगों और कंप्यूटर के बीच संवाद हो सके."
कल पर नजर
काम के लिए निर्देश देते ही नंबर भी डायल हो सकते हैं. लेकिन इससे भी आगे जाने का इरादा है. एक्सपर्ट देख रहे हैं कि कैसे आंखों ही आंखों में कार चल जाए. लक्ष्य ऐसा है कि भविष्य के कंप्यूटर सोच भी सकेंगे और आपकी बात समझ भी सकेंगे.
प्रयोगशाला में ऐसी कार पर काम चल रहा है, जो आंखों और आवाज से चल सके. क्वांटम कंप्यूटर पर तो रिसर्चर एक अणु पर भी काम कर सकते हैं. भविष्य के कंप्यूटर और तेज होंगे. लेकिन उनकी बिजली की खपत भी कम करनी होगी. फ्यूचर कंप्यूटर बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है.
सारब्रुकेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांक विलहेम माउख का कहना है, "हम कंप्यूटर पर एक साथ अलग अलग जानकारी फीड कर सकते हैं. लेकिन जैसे हाथ से उछला सिक्का किस करवट गिरेगा, यह तय नहीं किया जा सकता, वैसे ही कंप्यूटर कौन सी जानकारी कहां डालेगा, यह तय करना मुश्किल है. सामान्य कंप्यूटर की तुलना में क्वांटम कंप्यूटर कई गुना तेजी से काम करता है."
भविष्य का डीएनए कंप्यूटर बायो मॉलिक्यूल के साथ काम करता है. और इसके लिए एक कोशिका में लगने वाली ऊर्जा से काम चल जाता है. वाल्स्टर मानते हैं कि कंप्यूटर चाहे कितने भी बुद्धिमान क्यों न हो जाएं, वे इंसान की जगह नहीं ले सकते हैं.
रिपोर्टः ग्रिट हॉफमन/एजेए
संपादनः आभा मोंढे